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अपने साथ अपनी माँ का नाम लगाकर लिखती हैं कविताएं-दिव्या भागवानी( दिव्य श्वेत)

शिवपुरी जैसे छोटे शहर मे रहकर भी कवियत्री दिव्या भागवानी( दिव्य श्वेत) बाल्यवस्था से कविता से जुड़ाव ,सोशल साइड के विभिन्न मंचो पर शिवपुरी व आसपास कवि सम्मेलनों में निरंतर सहभागिता।
वर्तमान में शिवपुरी आकाशवाणी में कार्यरत।
कविता लेखन में
कई स्थानों पर सम्मानित।
साहित्य सरल सम्मान से सम्मानित।
अपने साथ अपनी माँ का नाम लगाकर कविताएं लिखती हैं

दिव्या भागवानी( दिव्य श्वेत)
खुशियां
मिली थी मुझे खुशियां सागर किनारे
किए थे मैंने उसे दूर से ही इशारे ‌..
मैं बोली पास जाकर क्यों नहीं आती तुम
क्या मोहल्ले नहीं लगते तुम्हें प्यारे …
बोली खुशी थोड़ा सा मुस्कुराकर
मुझे भाती है अब सागर की लहरें ..
लहरें नहीं जलती कभी सागर से
रहूंगी मैं भी अब सागर किनारे ..
नहीं भाती मुझे इंसानों की दुनियां
जल के मर जाते हैं सारे के सारे . ‌..
खुशी की बात तो सही थी
नहीं होते यहां सारे लोग प्यारे
मिली थी मुझे खुशियां सागर किनारे….
दिव्या भागवानी
दिव्य श्वेत

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