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मजबूर मानवता से मुंह मांगा शुल्क बसूलने वाले टेक्स मुक्त शिक्षा स्वास्थ पर नहीं लगेगा टेक्स

व्ही.एस.भुल्ले अब इसे हमारी महान लोकतांत्रिक व्यवस्था की विडम्बना कहे या र्दुभाग्य कि जिन क्षेत्रों की सेवा संसाधनों को कभी पवित्र सेवा माध्यम मान ईश्वर की तरह पूजा जाता था। आज सेवा, संसाधनो के नाम सर्वाधिक बेरहम लूट इन्हीं क्षेत्रों में होती है शिक्षा, स्वास्थ सेवा को मजबूर मानवता से मुंह मांगी बसूली का आलम यह है कि अच्छी से अच्छी ताकतवर सरकारों के इस क्षेत्र में हाथ डालते ही या तो हलक सूख जाते है या फिर गले इतने तर हो जाते है कि वह न तो कुछ कहने लायक और न ही कुछ करने लायक रह जाते है। और मजबूर मानवता सरेयाम शिक्षा, स्वास्थ माफियाओं के आगे लुटने मजबूर हो जाती है। 
         सरकार की मजबूरी नैतिकता बस यह है कि वह स्वयं इस दोष से कलंकित है। कि वह स्वयं अपनी जबावदेही तय कर फ्री या निर्धारित मूल्य पर शिक्षा, स्वास्थ जैसी राष्ट्र की अहम जरुरत पूरा करने में अक्षम असफल साबित हो रही है और न ही इन क्षेत्रों में मची लूट पर वह कोई विराम लगा पा रही है। 
         मानव से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ जैसे अहम अंग जीवन के वह भाग है जिसमें मानव चाह कर भी समझौता नहीं कर सकता, न ही उसे सरकारों से कोई संरक्षण मिलता। ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ जैसे क्षेत्रों को टेक्स मुक्त रखना शायद सरकारों की मजबूरी नहीं अक्षमता है। जिसमें सुधार की सख्त जरुरत है। और यह तभी सम्भव है जब सरकारें इन क्षेत्रों में प्रभावी पकड़ कायम करे, बरना जनधन की मुंह मांगी लूट का सिलसिला सेवा, संसाधनों के नाम इसी तरह इन क्षेत्रों में सरकारों के लिये कलंक साबित होता रहेेगा।  

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