वरिष्ठ पत्रकार जयकिशन शर्मा की सातवीं पुण्यतिथि
26 मई को
-पत्रकारिता में व्यक्तित्व और कृतित्व के लिए सदा स्मृत रहेंगे स्व. शर्मा
मंथन न्यूज शिवपुरी ब्यूरो। पत्रकारिता कभी मिशन थी। पत्रकार भरोसेमंद थे। उदारीकरण के दौर ने पत्रकारिता के आदर्श और गरिमा को लील लिया। पीत पत्रकारिता ने पत्रकारों को नीचा देखने पर विवश कर दिया। उपरोक्त दौर में निडर और निर्भीक पत्रकारिता का जयघोष किया पत्रकारिता के जय किशन ने। सीधे सपाट लहजे में उन्होंने हुक्मरानों को सीधी चुनौती अपनी आवाज को बुलंद करके दी। उनके तथ्य और प्रमाणों ने जिम्मेदारों को जवाबदेह बनने पर विवश कर दिया। पत्रकारिता की नई पौधों (नए युवा पत्रकार) के लिए जयकिशन शर्मा एक ऐसे वट वृक्ष थे जिनकी छांव में वह धूप और पानी (प्रतिकूल परिस्थितियां) से न सिर्फ बच सकते थे बल्कि जयकिशन के नेतृत्व में उनका मुकाबला भी डट कर करने में सक्षम थे। पत्रकारिता के जय किशन ने पत्रकारों की अस्मिता और उनकी आन बान के लिए सदा संघर्षरत रहने का संकल्प ले रखा था जिसका आखिरी सांस तक उन्होंने स्वप्रेरणा से पालन किया। पत्रकारिता की मौजूदा तीन पीढिय़ां इस तथ्य की गवाह हैं कि जयकिशन ने सत्य से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया। सत्य को उजागर करने का उनका तरीका अनूठा था। उनकी शैली वेमिशाल थी आज भी जयकिशन जैसा कोई और नहीं है। यह वह प्रमाण है जो पत्रकारों के समक्ष आने वाली विपरीत स्थितियों में हर पत्रकार के मुंह से उजागर होता है। निवर्तमान सीर्ईओ नेहा मारव्या से पत्रकारों के विवाद और धरना प्रदर्शन के दौरान प्रत्येक पत्रकार को पत्रकारिता के जयकिशन की कमी खली। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने वेबाकी से पत्रकारों के बीच कहा कि आज जयकिशन होता तो…..। पत्रकार विवेकवर्धन शर्मा ने कहा कि दादा (स्व. जयकिशन शर्मा)आज होते तो पत्रकारों को इन हालातों का सामना नहीं करना पड़ता जैसे ही दादा नेहा के सामने निडरता से खड़े होते नेहा को यह अहसास हो जाता कि बर्र के छते में हाथ दे डाला है। पत्रकार राजकुमार शर्मा ने कहा कि जब-जब जिस-जिस दौर में पत्रकारिता की जय होगी! पत्रकारिता के जयकिशन के नाम का स्वत: जय घोष होगा। उनकी निडरता, दो टूक साफ गोई और उनकी चौका देने वाली जानकारियों को बेबाकी से सामने रखने की कला के भी चर्चे होंगे। पत्रकारिता में उनका प्रतिनिधित्व करने वाले उनके सुपुत्र केबी शर्मा लालू ने कहा कि परम पूज्य पिता जी ने कभी अपने आदर्श और शैली से समझौता नहीं किया। यह सच है कि उनका बैंक बैलेंस कभी उल्लेखनीय नहीं रहा लेकिन उनके नाम मात्र में इतना प्रभाव था कि प्रभावशाली भी उनका नाम सुनकर सहम जाते थे आज भी उनकी शैली और बेबाकी की झलक मुझ में सभी देखना चाहते हैं यह उनकी कर्तव्य निष्ठा का वह बैलेंस है जो उपलब्धि मूलक होने के साथ-साथ लगातार बढ़ा है कभी घटा नहीं। पत्रकारिता के जयकिशन को सदा स्मृत रखने और नई पीड़ी को सतत् उनसे प्रेरणा मिले इसलिए पत्रकार प्रतिवर्ष उनका पुण्य दिवस (पुण्यतिथि) मनाते हैं। आदर्श और सीखने लायक पत्रकारिता के पुरोधा स्व. जयकिशन की सातवीं पुण्यतिथि 26 मर्ई को सभी पत्रकार कम्युनिटी हॉल गांधी पार्क में मनायेंगे। पुण्यतिथि कार्यक्रम में जयकिशन के कृतित्व और व्यक्तित्व पर पत्रकारों द्वारा प्रकाश डाला जाएगा। इस कार्यक्रम में पत्रकारिता के जय किशन शीर्षक से प्रकाशित एक पत्रिका का विमोचन भी किया जाएगा। पत्रकार सत्यम पाठक ने स्व. जयकिशन शर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पत्रकारिता के जयकिशन भले ही हमारे बीच न हो लेकिन पत्रकारिता की जय और विजय के हर क्षण में स्व. जयकिशन की ही झलक और जय घोष में उनकी ध्वनि ही सुनाई देती है। पत्रकारों के लिए जयकिशन सदा स्मृत और प्रेरणा के प्रकाश पुंज रहेंगे। जय हो पत्रकारिता के जयकिशन की। विजय हो पत्रकारिता की।
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